बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ करहु बालक पर छोहू। सूध दूधमुख करिअ न कोहू।।
मूल पाठ
नाथ करहु बालक पर छोहू। सूध दूधमुख करिअ न कोहू।।
जौं पै प्रभु प्रभाउ कछु जाना। तौ कि बराबरि करत अयाना।।
स्रोत अभिलेख 1.277 · पुस्तक पृ. 265, 266
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! बालकपर कृपा कीजिये। इस सीधे और दुधमुँहे बच्चेपर क्रोध न कीजिये। यदि यह प्रभुका (आपका) कुछ भी प्रभाव जानता, तो क्या यह बेसमझ आपकी बराबरी करता?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 265 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नाथ करहु बालक पर छोहू। सूध दूधमुख करिअ न कोहू।।
English explanation
My lord, show affection to the boy. Regard him as an innocent, milk-fed child and do not be angry.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | my lord |
| करहु | कीजिए | please show |
| बालक | बालक; यहाँ लक्ष्मण | the boy, here Lakshmana |
| पर | पर | toward |
| छोहू | स्नेह, दया | affection, compassion |
| सूध | सीधा-सादा, निष्कपट | innocent, guileless |
| दूधमुख | दूधमुँहा बच्चा | a milk-fed little child |
| करिअ | कीजिए | please exercise |
| न | नहीं | not |
| कोहू | क्रोध | anger |
2 जौं पै प्रभु प्रभाउ कछु जाना। तौ कि बराबरि करत अयाना।।
English explanation
Lord, if this unknowing boy had understood anything of your might, would he have tried to match you?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| पै | ही; यदि के साथ बल देने वाला अव्यय | indeed; emphasizes the condition |
| प्रभु | हे प्रभु; यहाँ परशुराम | Lord, here Parashurama |
| प्रभाउ | आपका प्रभाव, सामर्थ्य | your might and stature |
| कछु | कुछ भी | anything |
| जाना | जानता होता | had known |
| तौ | तो | then |
| कि | क्या | would he? |
| बराबरि | बराबरी, होड़ | rivalry, matching you |
| करत | करता | would engage in |
| अयाना | नासमझ बालक | the unknowing boy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.277
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 265
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 265, 266
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।