बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नहिं संतोषु त पुनि कछु कहहू। जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइतनेपर भी सन्तोष न हुआ हो तो फिर कुछ कह डालिये। क्रोध रोककर असह्य दु:ख मत सहिये। आप वीरताका व्रत धारण करनेवाले, धैर्यवान् और क्षोभरहित हैं। गाली देते शोभा नहीं पाते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 263 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नहिं संतोषु त पुनि कछु कहहू। जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहू।।
बीरब्रती तुम्ह धीर अछोभा। गारी देत न पावहु सोभा।।
स्रोत अभिलेख 1.274 · पुस्तक पृ. 262, 263
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नहिं संतोषु त पुनि कछु कहहू। जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहू।।
English explanation
If you are not satisfied, say some more. Do not suffer unbearable distress by holding back your anger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नहिं | नहीं | not |
| संतोषु | संतोष; तृप्ति | satisfaction |
| त | तो | then |
| पुनि | फिर; और | again; further |
| कछु | कुछ | something |
| कहहू | कहिए | say |
| जनि | मत | do not |
| रिस | क्रोध | anger |
| रोकि | रोककर | by holding back |
| दुसह | असह्य | unbearable |
| दुख | दुख | distress |
| सहहू | सहिए | suffer; endure |
2 बीरब्रती तुम्ह धीर अछोभा। गारी देत न पावहु सोभा।।
English explanation
You are pledged to valor, steadfast and unshaken; hurling insults does not bring you dignity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बीरब्रती | वीरता का व्रत धारण करने वाले | pledged to valor |
| तुम्ह | आप | you |
| धीर | धैर्यवान; स्थिरचित्त | steadfast; composed |
| अछोभा | क्षोभ से अडिग; विचलित न होने वाले | unshaken; not perturbed |
| गारी | गालियाँ; अपशब्द | insults; abusive words |
| देत | देते हुए | while giving |
| न | नहीं | not |
| पावहु | पाते हैं | gain |
| सोभा | शोभा; गरिमा | dignity; credit |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.274
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 263
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 262, 263
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।