बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नहिं तव आदि मध्य अवसाना। अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआपका न आदि है, न मध्य है और न अन्त है। आपके असीम प्रभावको वेद भी नहीं जानते। आप संसारको उत्पन्न, पालन और नाश करनेवाली हैं। विश्वको मोहित करनेवाली और स्वतन्त्ररूपसे विहार करनेवाली हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 230 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नहिं तव आदि मध्य अवसाना। अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना।।
भव भव बिभव पराभव कारिनि। बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि।।
स्रोत अभिलेख 1.235 · पुस्तक पृ. 229, 230
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नहिं तव आदि मध्य अवसाना। अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना।।
English explanation
You have neither beginning, middle, nor end. Even the Vedas have not fathomed your boundless power.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नहिं | नहीं है | there is no |
| तव | आपका | your |
| आदि | आरंभ | beginning |
| मध्य | मध्य | middle |
| अवसाना | अंत | end |
| अमित | असीम | boundless |
| प्रभाउ | प्रभाव; सामर्थ्य | power; might |
| बेदु | वेद ने भी | even the Vedas |
| नहिं | नहीं | not |
| जाना | जाना | fathomed |
2 भव भव बिभव पराभव कारिनि। बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि।।
English explanation
You bring about the world’s arising, flourishing, and dissolution; you enchant the universe and move about according to your own will.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | संसार की | of worldly existence |
| भव | उत्पत्ति | arising; creation |
| बिभव | समृद्धि; अभ्युदय | flourishing; prosperity |
| पराभव | नाश; पतन | dissolution; downfall |
| कारिनि | करने वाली | she who brings about |
| बिस्व | विश्व को | the universe |
| बिमोहनि | मोहित करने वाली | she who enchants |
| स्वबस | अपनी इच्छा के अधीन | governed by her own will |
| बिहारिनि | विहार करने वाली | she who moves or sports freely |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.235
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 230
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 229, 230
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।