बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नदी पुनीत सुमानस नंदिनि। कलिमल तृन तरु मूल निकंदिनि।।
मूल पाठ
नदी पुनीत सुमानस नंदिनि। कलिमल तृन तरु मूल निकंदिनि।।
स्रोत अभिलेख 1.39 · पुस्तक पृ. 61, 63
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह सुन्दर मानस-सरोवरकी कन्या सरयू नदी बड़ी पवित्र है और कलियुगके [छोटे-बड़े] पापरूपी तिनकों और वृक्षोंको जड़से उखाड़ फेंकनेवाली है॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 62 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नदी पुनीत सुमानस नंदिनि। कलिमल तृन तरु मूल निकंदिनि।।
English explanation
This sacred river is the daughter of the beautiful Manas lake, uprooting the grass and trees that represent the evils of the Kali age.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नदी | नदी | river |
| पुनीत | पवित्र | sacred |
| सुमानस | सुंदर मानस सरोवर की | of the beautiful Manas lake |
| नंदिनि | पुत्री | daughter |
| कलिमल | कलियुग के पाप-रूपी | representing the evils of the Kali age |
| तृन | घास | grass |
| तरु | वृक्ष | trees |
| मूल | जड़ से | by the roots |
| निकंदिनि | उखाड़ने वाली | uprooting |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 62
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 61, 63
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।