बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ध्वज पताक पट चामर चारु। छावा परम बिचित्र बजारू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दध्वजा, पताका, परदे और सुन्दर चँवरोंसे सारा बाजार बहुत ही अनूठा छाया हुआ है। सोनेके कलश, तोरण, मणियोंकी झालरें, हलदी, दूब, दही, अक्षत और मालाओंसे—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 280 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ध्वज पताक पट चामर चारु। छावा परम बिचित्र बजारू।।
कनक कलस तोरन मनि जाला। हरद दूब दधि अच्छत माला।।
स्रोत अभिलेख 1.296 · पुस्तक पृ. 280, 280
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ध्वज पताक पट चामर चारु। छावा परम बिचित्र बजारू।।
English explanation
The marketplace was canopied and splendidly decorated with flags, pennants, fabrics, and beautiful yak-tail whisks.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ध्वज | ध्वज | flags |
| पताक | पताकाएँ | pennants |
| पट | सजावट के वस्त्र | decorative fabrics |
| चामर | चँवर | yak-tail whisks |
| चारु | सुंदर | beautiful |
| छावा | ढका या छाया गया | was covered or canopied |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| बिचित्र | विविध और अद्भुत ढंग से | in a varied, splendid manner |
| बजारू | बाजार | marketplace |
2 कनक कलस तोरन मनि जाला। हरद दूब दधि अच्छत माला।।
English explanation
Golden ceremonial pots, festoons, jewel lattices, turmeric, sacred grass, curd, unbroken rice grains, and garlands were arranged for auspicious decoration.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कनक | सोने के | golden |
| कलस | कलश | ceremonial pots |
| तोरन | द्वारों के सजावटी बंदनवार | decorative doorway festoons |
| मनि | मणियों के | of jewels |
| जाला | जाल या झालरें | lattices or hanging ornaments |
| हरद | हल्दी | turmeric |
| दूब | दूर्वा घास | sacred durva grass |
| दधि | दही | curd |
| अच्छत | अक्षत, अखंड चावल | unbroken ceremonial rice grains |
| माला | मालाएँ | garlands |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.296
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 280
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 280, 280
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।