बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जद्यपि अवध सदैव सुहावनि। राम पुरी मंगलमय पावनि।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयद्यपि अयोध्या सदा सुहावनी है, क्योंकि वह श्रीरामजीकी मङ्गलमयी पवित्र पुरी है, तथापि प्रीति-पर-प्रीति होनेसे वह सुन्दर मङ्गलरचनासे सजायी गयी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 280 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जद्यपि अवध सदैव सुहावनि। राम पुरी मंगलमय पावनि।।
तदपि प्रीति कै प्रीति सुहाई। मंगल रचना रची बनाई।।
स्रोत अभिलेख 1.296 · पुस्तक पृ. 280, 280
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जद्यपि अवध सदैव सुहावनि। राम पुरी मंगलमय पावनि।।
English explanation
Although Ayodhya is always beautiful—this city of Rama is auspicious and sacred.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| अवध | अयोध्या नगरी | the city of Ayodhya |
| सदैव | हमेशा | always |
| सुहावनि | सुंदर और मनोहर | beautiful and pleasing |
| राम | राम की | of Rama |
| पुरी | नगरी | city |
| मंगलमय | मंगल से परिपूर्ण | full of auspiciousness |
| पावनि | पवित्र | sacred |
2 तदपि प्रीति कै प्रीति सुहाई। मंगल रचना रची बनाई।।
English explanation
Nevertheless, as a lovely expression of affection, auspicious decorations were fashioned and prepared. The supplied phrase ‘प्रीति कै प्रीति’ is somewhat unclear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| कै | की | of |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| सुहाई | सुंदर, सुहावनी | lovely |
| मंगल | शुभ | auspicious |
| रचना | सजावट की व्यवस्था | decorative arrangements |
| रची | रची | fashioned |
| बनाई | तैयार की | prepared |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.296
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 280
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 280, 280
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।