बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धूप धूम नभु मेचक भयऊ। सावन घन घमंडु जनु ठयऊ।।
मूल पाठ
धूप धूम नभु मेचक भयऊ। सावन घन घमंडु जनु ठयऊ।।
सुरतरु सुमन माल सुर बरषहिं। मनहुँ बलाक अवलि मनु करषहिं।।
स्रोत अभिलेख 1.347 · पुस्तक पृ. 329, 329
भावार्थ
मूल पाठ के बादधूपके धूएँसे आकाश ऐसा काला हो गया है मानो सावनके बादल घुमड़-घुमड़कर छा गये हों। देवता कल्पवृक्षके फूलोंकी मालाएँ बरसा रहे हैं। वे ऐसी लगती हैं मानो बगुलोंकी पाँति मनको [अपनी ओर] खींच रही हो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 329 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 धूप धूम नभु मेचक भयऊ। सावन घन घमंडु जनु ठयऊ।।
English explanation
Incense smoke darkened the sky, as though a mass of monsoon clouds had gathered.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धूप | सुगंधित धूप | incense |
| धूम | धुआँ | smoke |
| नभु | आकाश | the sky |
| मेचक | साँवला; गहरा काला | dark; dusky |
| भयऊ | हो गया | became |
| सावन | सावन महीने के | of the monsoon month of Sawan |
| घन | बादल | clouds |
| घमंडु | घनी घटा; बादलों का जमाव | a dense mass of clouds |
| जनु | मानो | as though |
| ठयऊ | छा गया; जम गया | gathered; settled overhead |
2 सुरतरु सुमन माल सुर बरषहिं। मनहुँ बलाक अवलि मनु करषहिं।।
English explanation
The gods shower garlands of flowers from the celestial wish-fulfilling tree, like rows of white herons that captivate the heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुरतरु | कल्पवृक्ष के | of the celestial wish-fulfilling tree |
| सुमन | फूल | flowers |
| माल | मालाएँ | garlands |
| सुर | देवता | the gods |
| बरषहिं | बरसाते हैं | shower down |
| मनहुँ | मानो | as though |
| बलाक | बगुलों की | of white herons |
| अवलि | पंक्तियाँ | rows |
| मनु | मन को | the heart |
| करषहिं | आकर्षित करती हैं | captivate |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.347
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 329
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 329, 329
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