बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देव गिरा सुनि सुंदर साँची। प्रीति अलौकिक दुहु दिसि माची।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददेवताओंकी सुन्दर सत्यवाणी सुनकर दोनों ओर अलौकिक प्रीति छा गयी। सुन्दर पाँवड़े और अघ्र्य देते हुए जनकजी दशरथजीको आदरपूर्वक मण्डपमें ले आये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 301 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देव गिरा सुनि सुंदर साँची। प्रीति अलौकिक दुहु दिसि माची।।
देत पाँवड़े अरघु सुहाए। सादर जनकु मंडपहिं ल्याए।।
स्रोत अभिलेख 1.32 · पुस्तक पृ. 301, 301
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देव गिरा सुनि सुंदर साँची। प्रीति अलौकिक दुहु दिसि माची।।
English explanation
Hearing the gods’ beautiful and truthful words, extraordinary affection arose on both sides.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देव | देवताओं की | of the gods |
| गिरा | वाणी | words |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| साँची | सच्ची | truthful |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| अलौकिक | साधारण से परे | extraordinary |
| दुहु | दोनों | both |
| दिसि | पक्षों में | on sides |
| माची | उमड़ पड़ा | welled up |
2 देत पाँवड़े अरघु सुहाए। सादर जनकु मंडपहिं ल्याए।।
English explanation
Providing cloths spread along the path and fine ceremonial offerings, Janaka respectfully brought Dasharatha into the wedding pavilion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देत | देते हुए | providing |
| पाँवड़े | पथ पर बिछाए जाने वाले वस्त्र | cloths spread along the path |
| अरघु | आदर का जलादि अर्पण | a ceremonial offering of water and other items |
| सुहाए | सुंदर | fine |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| जनकु | राजा जनक | King Janaka |
| मंडपहिं | मंडप में | into the wedding pavilion |
| ल्याए | ले आए | brought |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 301
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 301, 301
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।