बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखी जनक भीर भै भारी। सुचि सेवक सब लिए हँकारी।।
मूल पाठ
देखी जनक भीर भै भारी। सुचि सेवक सब लिए हँकारी।।
तुरत सकल लोगन्ह पहिं जाहू। आसन उचित देहू सब काहू।।
स्रोत अभिलेख 1.24 · पुस्तक पृ. 234, 235
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब जनकजीने देखा कि बड़ी भीड़ हो गयी है, तब उन्होंने सब विश्वासपात्र सेवकोंको बुलवा लिया और कहा—तुमलोग तुरंत सब लोगोंके पास जाओ और सब किसीको यथायोग्य आसन दो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 234 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 देखी जनक भीर भै भारी। सुचि सेवक सब लिए हँकारी।।
English explanation
Janaka saw that a great crowd had gathered and summoned all his upright attendants.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखी | देखा | saw |
| जनक | राजा जनक, सीता के पिता | King Janaka, Sita’s father |
| भीर | भीड़ | crowd |
| भै | हो गई | had become |
| भारी | बहुत बड़ी | very large |
| सुचि | शुचि; सदाचारी | pure; upright |
| सेवक | सेवकों को | attendants |
| सब | सभी | all |
| लिए | ले लिया; बुला लिया | had them brought |
| हँकारी | पुकारकर | by calling |
2 तुरत सकल लोगन्ह पहिं जाहू। आसन उचित देहू सब काहू।।
English explanation
Go immediately to all the people and give each one a suitable seat.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुरत | तुरंत | immediately |
| सकल | सभी | all |
| लोगन्ह | लोगों के | the people |
| पहिं | पास | to; near |
| जाहू | जाओ | go |
| आसन | बैठने का स्थान | seat |
| उचित | उपयुक्त | suitable |
| देहू | दो | give |
| सब | सब | every |
| काहू | किसी को; प्रत्येक को | person; to each one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 234
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 234, 235
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