बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि लोग सब भए सुखारे। एकटक लोचन चलत न तारे।।
मूल पाठ
देखि लोग सब भए सुखारे। एकटक लोचन चलत न तारे।।
हरषे जनकु देखि दोउ भाई। मुनि पद कमल गहे तब जाई।।
स्रोत अभिलेख 1.244 · पुस्तक पृ. 237, 238
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्हें देखकर सब लोग सुखी हुए। नेत्र एकटक (निमेषशून्य) हैं और तारे (पुतलियाँ) भी नहीं चलते। जनकजी दोनों भाइयोंको देखकर हॢषत हुए। तब उन्होंने जाकर मुनिके चरणकमल पकड़ लिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 237 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देखि लोग सब भए सुखारे। एकटक लोचन चलत न तारे।।
English explanation
Seeing them, everyone became delighted; they gaze fixedly, their pupils not moving.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | on seeing them |
| लोग | लोग | people |
| सब | सभी | all |
| भए | हो गए | became |
| सुखारे | आनंदित | delighted |
| एकटक | एकटक | with a fixed gaze |
| लोचन | आँखों की | of the eyes |
| चलत | हिलती हैं | move |
| न | नहीं | not |
| तारे | पुतलियाँ | pupils |
2 हरषे जनकु देखि दोउ भाई। मुनि पद कमल गहे तब जाई।।
English explanation
King Janaka rejoiced on seeing the two brothers; then he approached and clasped the sage’s lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषे | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| जनकु | राजा जनक | King Janaka |
| देखि | देखकर | on seeing |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई—राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| मुनि | मुनि विश्वामित्र के | of the sage Vishvamitra |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल-समान | lotus-like |
| गहे | पकड़ लिए | clasped |
| तब | तब | then |
| जाई | जाकर | having approached |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.244
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 237
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 237, 238
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