बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि राम छबि अति अनुरागीं। प्रेमबिबस पुनि पुनि पद लागीं।।
मूल पाठ
देखि राम छबि अति अनुरागीं। प्रेमबिबस पुनि पुनि पद लागीं।।
रही न लाज प्रीति उर छाई। सहज सनेहु बरनि किमि जाई।।
स्रोत अभिलेख 1.336 · पुस्तक पृ. 320, 320
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीकी छबि देखकर वे प्रेममें अत्यन्त मग्र हो गयीं और प्रेमके विशेष वश होकर बार-बार चरणों लगीं। हृदयमें प्रीति छा गयी, इससे लज्जा नहीं रह गयी। उनके स्वाभाविक स्नेहका वर्णन किस तरह किया जा सकता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 320 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि राम छबि अति अनुरागीं। प्रेमबिबस पुनि पुनि पद लागीं।।
English explanation
AI draft: Seeing Rama’s beautiful form, the women became deeply attached to him and, overcome with love, repeatedly bowed at his feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| राम | श्रीराम की | of Rama |
| छबि | सुंदर छवि | beautiful form |
| अति | अत्यंत | deeply |
| अनुरागीं | अनुरक्त हो गईं | became lovingly attached |
| प्रेमबिबस | प्रेम से विवश | overcome with love |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| पद | चरणों में | at his feet |
| लागीं | लगीं; प्रणाम किया | bowed down |
2 रही न लाज प्रीति उर छाई। सहज सनेहु बरनि किमि जाई।।
English explanation
Their reserve vanished, and love filled their hearts. How could such natural affection be described?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रही | रह गई | remained |
| न | नहीं | not |
| लाज | लज्जा या संकोच | modesty or reserve |
| प्रीति | प्रेम | love |
| उर | हृदय में | in the heart |
| छाई | छा गई | spread throughout |
| सहज | स्वाभाविक | natural |
| सनेहु | स्नेह | affection |
| बरनि | वर्णन किया | described |
| किमि | कैसे | how |
| जाई | जा सकता है | can be |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.336
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 320
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 320, 320
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।