बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि तात तव सहज सुधाई। प्रीति प्रतीति नीति निपुनाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे तात! तुम्हारा स्वाभाविक सीधापन (सरलता), प्रेम, विश्वास और नीतिमें निपुणता देखकर मेरे मनमें तुम्हारे ऊपर बड़ी ममता उत्पन्न हो गयी है; इसीलिये मैं तुम्हारे पूछनेपर अपनी कथा कहता हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 168 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देखि तात तव सहज सुधाई। प्रीति प्रतीति नीति निपुनाई।।
उपजि परि ममता मन मोरें। कहउँ कथा निज पूछे तोरें।।
स्रोत अभिलेख 1.164 · पुस्तक पृ. 168, 168
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 देखि तात तव सहज सुधाई। प्रीति प्रतीति नीति निपुनाई।।
English explanation
Dear one, seeing your natural sincerity, affection, trust, and skill in prudent conduct—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| तव | तुम्हारी | your |
| सहज | स्वाभाविक | natural |
| सुधाई | सरलता और सच्चाई | sincerity and straightforwardness |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| प्रतीति | विश्वास | trust |
| नीति | नीति में | in prudent conduct |
| निपुनाई | निपुणता | skill |
2 उपजि परि ममता मन मोरें। कहउँ कथा निज पूछे तोरें।।
English explanation
Affection for you has arisen in my heart. At your asking, I tell my own story.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उपजि | उत्पन्न हो | arisen |
| परि | गई है | has come to be |
| ममता | अपनापन और स्नेह | fond affection |
| मन | मन में | in the heart |
| मोरें | मेरे | my |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I tell |
| कथा | कथा | story |
| निज | अपनी | my own |
| पूछे | पूछने पर | upon asking |
| तोरें | तुम्हारे | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.164
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 168
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 168, 168
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।