बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब प्रसन्न मैं संसय नाहीं। मागु जो भूप भाव मन माहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअब मैं प्रसन्न हूँ, इसमें सन्देह न करना। हे राजन्! जो मनको भावे वही माँग लो। सुन्दर (प्रिय) वचन सुनकर राजा हॢषत हो गया और [मुनिके] पैर पकड़कर उसने बहुत प्रकारसे विनती की॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 168 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अब प्रसन्न मैं संसय नाहीं। मागु जो भूप भाव मन माहीं।।
सुनि सुबचन भूपति हरषाना। गहि पद बिनय कीन्हि बिधि नाना।।
स्रोत अभिलेख 1.164 · पुस्तक पृ. 168, 168
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अब प्रसन्न मैं संसय नाहीं। मागु जो भूप भाव मन माहीं।।
English explanation
Now I am pleased, without doubt. O king, ask for whatever pleases your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| प्रसन्न | प्रसन्न | pleased |
| मैं | मैं | I |
| संसय | संदेह | doubt |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
| मागु | माँगो | ask for |
| जो | जो कुछ | whatever |
| भूप | हे राजा | O king |
| भाव | अच्छा लगे | pleases |
| मन | मन | the heart |
| माहीं | में | in |
2 सुनि सुबचन भूपति हरषाना। गहि पद बिनय कीन्हि बिधि नाना।।
English explanation
Hearing these gracious words, the king rejoiced. Grasping the speaker’s feet, he made entreaties in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing |
| सुबचन | मधुर वचन | gracious words |
| भूपति | राजा | the king |
| हरषाना | प्रसन्न हुआ | rejoiced |
| गहि | पकड़कर | grasping |
| पद | चरण | feet |
| बिनय | विनती | entreaty |
| कीन्हि | की | made |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| नाना | अनेक | many |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.164
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 168
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 168, 168
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।