बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि अनूप एक अँवराई। सब सुपास सब भाँति सुहाई।।
मूल पाठ
देखि अनूप एक अँवराई। सब सुपास सब भाँति सुहाई।।
कौसिक कहेउ मोर मनु माना। इहाँ रहिअ रघुबीर सुजाना।।
स्रोत अभिलेख 1.214 · पुस्तक पृ. 212, 213
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[वहीं] आमोंका एक अनुपम बाग देखकर, जहाँ सब प्रकारके सुभीते थे और जो सब तरहसे सुहावना था, विश्वामित्रजीने कहा—हे सुजान रघुवीर! मेरा मन कहता है कि यहीं रहा जाय॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 212 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देखि अनूप एक अँवराई। सब सुपास सब भाँति सुहाई।।
English explanation
They saw an incomparable mango grove, furnished with every convenience and lovely in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर; देखी | seeing; saw |
| अनूप | अनुपम | incomparable |
| एक | एक | a |
| अँवराई | आमों की बगीची | mango grove |
| सब | सभी | all |
| सुपास | सुविधाएँ और सुख-साधन | conveniences and comforts |
| सब | हर | every |
| भाँति | प्रकार से | in respect |
| सुहाई | सुंदर और मनोहर | lovely and pleasing |
2 कौसिक कहेउ मोर मनु माना। इहाँ रहिअ रघुबीर सुजाना।।
English explanation
Vishvamitra said, ‘My heart is pleased with this place. Wise hero of Raghu’s lineage, let us stay here.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसिक | कुशिकवंशी ऋषि विश्वामित्र | Vishvamitra, sage of Kushika’s lineage |
| कहेउ | कहा | said |
| मोर | मेरा | my |
| मनु | मन | heart |
| माना | प्रसन्न हुआ; इसे पसंद किया | was pleased; approved of it |
| इहाँ | यहाँ | here |
| रहिअ | ठहरें | let us stay |
| रघुबीर | हे रघुकुल के वीर राम | O Rama, hero of Raghu’s lineage |
| सुजाना | हे सुबुद्धि और विवेकी | O wise and discerning one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.214
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 212
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका जनकपुरमें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 212, 213
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