बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दसरथु सहित समाज बिराजे। बिभव बिलोकि लोकपति लाजे।।
मूल पाठ
दसरथु सहित समाज बिराजे। बिभव बिलोकि लोकपति लाजे।।
समयँ समयँ सुर बरषहिं फूला। सांति पढ़हिं महिसुर अनुकूला।।
स्रोत अभिलेख 1.319 · पुस्तक पृ. 300, 300
भावार्थ
मूल पाठ के बाददशरथजी अपनी मण्डलीसहित विराजमान हुए। उनके वैभवको देखकर लोकपाल भी लजा गये। समय-समयपर देवता फूल बरसाते हैं और भूदेव ब्राह्मण समयानुकूल शान्ति-पाठ करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 300 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दसरथु सहित समाज बिराजे। बिभव बिलोकि लोकपति लाजे।।
English explanation
Dasharatha was seated with his company. Seeing the splendor there, even the rulers of the worlds felt abashed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दसरथु | राम के पिता राजा दशरथ | King Dasharatha, Rama's father |
| सहित | साथ | together with |
| समाज | साथ आए लोगों के समूह | his accompanying company |
| बिराजे | विराजमान थे | were seated in honor |
| बिभव | वैभव | splendor |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| लोकपति | लोकों के अधिपति | rulers of the worlds |
| लाजे | लज्जित हुए | felt abashed |
2 समयँ समयँ सुर बरषहिं फूला। सांति पढ़हिं महिसुर अनुकूला।।
English explanation
From time to time, the gods shower flowers, while the Brahmins recite auspicious invocations of peace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समयँ | समय पर | at intervals |
| समयँ | समय पर | at intervals |
| सुर | देवता | the gods |
| बरषहिं | बरसाते हैं | shower |
| फूला | फूल | flowers |
| सांति | शांति-मंत्र | invocations of peace |
| पढ़हिं | पढ़ते हैं | recite |
| महिसुर | ब्राह्मण | Brahmins |
| अनुकूला | मंगलकारी | auspicious and favorable |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.319
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 300
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 300, 300
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।