बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दरस लालसा सकुच न थोरी। प्रगटत दुरत बहोरि बहोरी।।
मूल पाठ
दरस लालसा सकुच न थोरी। प्रगटत दुरत बहोरि बहोरी।।
भए मगन सब देखनिहारे। जनक समान अपान बिसारे।।
स्रोत अभिलेख 1.325 · पुस्तक पृ. 307, 308
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्हें (कामदेव और रतिको) दर्शनकी लालसा और संकोच दोनों ही कम नहीं हैं (अर्थात् बहुत हैं); इसीलिये वे मानो बार-बार प्रकट होते और छिपते हैं। सब देखनेवाले आनन्दमग्न हो गये और जनकजीकी भाँति सभी अपनी सुध भूल गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 307 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 दरस लालसा सकुच न थोरी। प्रगटत दुरत बहोरि बहोरी।।
English explanation
Their longing to see and their shyness are both intense; they seem repeatedly to appear and hide.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दरस | दर्शन की | to behold |
| लालसा | लालसा | longing |
| सकुच | संकोच | shyness |
| न | नहीं | not |
| थोरी | थोड़ी; कम | slight |
| प्रगटत | प्रकट होते हैं | appear |
| दुरत | छिपते हैं | hide |
| बहोरि | फिर | again |
| बहोरी | फिर | again |
2 भए मगन सब देखनिहारे। जनक समान अपान बिसारे।।
English explanation
All the onlookers became absorbed in joy and, like Janaka, forgot themselves.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| मगन | आनंद में मग्न | absorbed in joy |
| सब | सभी | all |
| देखनिहारे | देखने वाले | onlookers |
| जनक | सीता के पिता राजा जनक | King Janaka, Sita’s father |
| समान | के समान | like |
| अपान | अपने आप को; अपनी सुध | themselves; self-awareness |
| बिसारे | भूल गए | forgot |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.325
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 307
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 307, 308
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।