बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दच्छ न कछु पूछी कुसलाता। सतिहि बिलोकि जरे सब गाता।।
मूल पाठ
दच्छ न कछु पूछी कुसलाता। सतिहि बिलोकि जरे सब गाता।।
सतीं जाइ देखेउ तब जागा। कतहुँ न दीख संभु कर भागा।।
स्रोत अभिलेख 1.63 · पुस्तक पृ. 82, 83
भावार्थ
मूल पाठ के बाददक्षने तो उनकी कुछ कुशलतक नहीं पूछी, सतीजीको देखकर उलटे उनके सारे अङ्ग जल उठे। तब सतीने जाकर यज्ञ देखा तो वहाँ कहीं शिवजीका भाग दिखायी नहीं दिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 82 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 दच्छ न कछु पूछी कुसलाता। सतिहि बिलोकि जरे सब गाता।।
English explanation
Daksha did not ask at all about her welfare; at the sight of Sati, his whole body burned with anger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दच्छ | दक्ष ने | Daksha |
| न | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | at all |
| पूछी | पूछा | asked about |
| कुसलाता | कुशल-क्षेम | her well-being |
| सतिहि | सती को | Sati |
| बिलोकि | देखकर | on seeing |
| जरे | जल उठे | burned with anger |
| सब | सभी | all |
| गाता | अंग | his limbs |
2 सतीं जाइ देखेउ तब जागा। कतहुँ न दीख संभु कर भागा।।
English explanation
Then Sati went and inspected the sacrifice; nowhere did she see a share allotted to Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सतीं | सती ने | Sati |
| जाइ | जाकर | having gone |
| देखेउ | देखा | inspected |
| तब | तब | then |
| जागा | यज्ञ | the sacrifice |
| कतहुँ | कहीं भी | anywhere |
| न | नहीं | not |
| दीख | दिखाई दिया | was visible |
| संभु | शंभु, शिव | Shambhu, Shiva |
| कर | का | belonging to |
| भागा | यज्ञ का अंश | share in the sacrificial offerings |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.63
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 82
- सहायक विषय
- सतीका दक्ष-यज्ञमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 82, 83
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