बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब चित चढ़ेउ जो संकर कहेऊ। प्रभु अपमानु समुझि उर दहेऊ।।
मूल पाठ
तब चित चढ़ेउ जो संकर कहेऊ। प्रभु अपमानु समुझि उर दहेऊ।।
पाछिल दुखु न हृदयँ अस ब्यापा। जस यह भयउ महा परितापा।।
स्रोत अभिलेख 1.63 · पुस्तक पृ. 82, 83
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब शिवजीने जो कहा था वह उनकी समझमें आया। स्वामीका अपमान समझकर सतीका हृदय जल उठा। पिछला (पतिपरित्यागका) दु:ख उनके हृदयमें उतना नहीं व्यापा था, जितना महान् दु:ख इस समय (पति-अपमानके कारण) हुआ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 82 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब चित चढ़ेउ जो संकर कहेऊ। प्रभु अपमानु समुझि उर दहेऊ।।
English explanation
Then Sati recalled what Shiva had said. Recognizing the insult to her lord, her heart burned.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| चित | चित्त में | to mind |
| चढ़ेउ | उभर आया, याद आया | came back; was recalled |
| जो | जो बात | what |
| संकर | शंकर ने | Shankara, Shiva |
| कहेऊ | कही थी | had said |
| प्रभु | अपने प्रभु शिव का | to her lord, Shiva |
| अपमानु | अपमान | insult |
| समुझि | समझकर | recognizing |
| उर | हृदय | her heart |
| दहेऊ | जल उठा | burned |
2 पाछिल दुखु न हृदयँ अस ब्यापा। जस यह भयउ महा परितापा।।
English explanation
Her earlier sorrow had not overwhelmed her heart as deeply as the great anguish caused by this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाछिल | पहले का | earlier |
| दुखु | दुःख | sorrow |
| न | नहीं | not |
| हृदयँ | हृदय में | in her heart |
| अस | इस प्रकार, इतना | so deeply |
| ब्यापा | व्याप्त हुआ | pervaded; overwhelmed |
| जस | जितना | as much as |
| यह | यह वर्तमान दुःख | this present anguish |
| भयउ | हुआ | arose |
| महा | महान, अत्यंत | great; intense |
| परितापा | संताप | anguish |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.63
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 82
- सहायक विषय
- सतीका दक्ष-यज्ञमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 82, 83
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