बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जद्यपि जग दारुन दुख नाना। सब तें कठिन जाति अवमाना।।
मूल पाठ
जद्यपि जग दारुन दुख नाना। सब तें कठिन जाति अवमाना।।
समुझि सो सतिहि भयउ अति क्रोधा। बहु बिधि जननीं कीन्ह प्रबोधा।।
स्रोत अभिलेख 1.63 · पुस्तक पृ. 82, 83
भावार्थ
मूल पाठ के बादयद्यपि जगत्में अनेक प्रकारके दारुण दु:ख हैं, तथापि जाति-अपमान सबसे बढ़कर कठिन है। यह समझकर सतीजीको बड़ा क्रोध हो आया। माताने उन्हें बहुत प्रकारसे समझाया- बुझाया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 82 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जद्यपि जग दारुन दुख नाना। सब तें कठिन जाति अवमाना।।
English explanation
Although the world contains many kinds of terrible suffering, dishonor to one's own community or kin is the most painful of all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| जग | संसार में | in the world |
| दारुन | भयंकर | terrible |
| दुख | दुःख | sufferings |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| सब | सब | all |
| तें | से | than |
| कठिन | अधिक पीड़ादायक | more painful |
| जाति | अपना जाति-कुल या समुदाय | one's own kin or community |
| अवमाना | अपमान | dishonor |
2 समुझि सो सतिहि भयउ अति क्रोधा। बहु बिधि जननीं कीन्ह प्रबोधा।।
English explanation
Understanding this, Sati became exceedingly angry. Her mother tried to reason with her in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझि | समझकर | understanding |
| सो | उस बात को | that |
| सतिहि | सती को | in Sati |
| भयउ | हुआ | arose |
| अति | अत्यंत | extreme |
| क्रोधा | क्रोध | anger |
| बहु | अनेक | many |
| बिधि | तरीकों से | in ways |
| जननीं | माता ने | her mother |
| कीन्ह | किया | offered |
| प्रबोधा | समझाना, ढाढ़स देना | counsel and reassurance |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.63
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 82
- सहायक विषय
- सतीका दक्ष-यज्ञमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 82, 83
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।