बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहि आश्रमहिं मदन जब गयऊ। निज मायाँ बसंत निरमयऊ।।
मूल पाठ
तेहि आश्रमहिं मदन जब गयऊ। निज मायाँ बसंत निरमयऊ।।
कुसुमित बिबिध बिटप बहुरंगा। कूजहिं कोकिल गुंजहि भृंगा।।
स्रोत अभिलेख 1.126 · पुस्तक पृ. 137, 138
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब कामदेव उस आश्रममें गया, तब उसने अपनी मायासे वहाँ वसन्त-ऋतुको उत्पन्न किया। तरह-तरहके वृक्षोंपर रंग-बिरंगे फूल खिल गये, उनपर कोयलें कूकने लगीं और भौंरे गुंजार करने लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 137 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तेहि आश्रमहिं मदन जब गयऊ। निज मायाँ बसंत निरमयऊ।।
English explanation
When Kama entered that hermitage, he created spring through his own illusory power.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| आश्रमहिं | आश्रम में | in the hermitage |
| मदन | कामदेव | Kama, the god of desire |
| जब | जब | when |
| गयऊ | गए | went |
| निज | अपनी | his own |
| मायाँ | माया से | through illusory power |
| बसंत | वसंत ऋतु | spring |
| निरमयऊ | रच दिया | created |
2 कुसुमित बिबिध बिटप बहुरंगा। कूजहिं कोकिल गुंजहि भृंगा।।
English explanation
Various trees blossomed in many colors; cuckoos call and bees hum.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुसुमित | फूलों से खिले हुए | in bloom |
| बिबिध | विविध प्रकार के | of various kinds |
| बिटप | वृक्ष | trees |
| बहुरंगा | अनेक रंगों वाले | many-colored |
| कूजहिं | कूकती हैं | call |
| कोकिल | कोयलें | cuckoos |
| गुंजहि | गूँजते हैं | hum |
| भृंगा | भौंरे | bees |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.126
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 137
- सहायक विषय
- अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 137, 138
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।