बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चली सुहावनि त्रिबिध बयारी। काम कृसानु बढ़ावनिहारी।।
मूल पाठ
चली सुहावनि त्रिबिध बयारी। काम कृसानु बढ़ावनिहारी।।
रंभादिक सुरनारि नबीना । सकल असमसर कला प्रबीना।।
स्रोत अभिलेख 1.126 · पुस्तक पृ. 137, 138
भावार्थ
मूल पाठ के बादकामाग्निको भड़कानेवाली तीन प्रकारकी (शीतल, मन्द और सुगन्ध) सुहावनी हवा चलने लगी। रम्भा आदि नवयुवती देवाङ्गनाएँ, जो सब-की-सब कामकलामें निपुण थीं,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 137 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चली सुहावनि त्रिबिध बयारी। काम कृसानु बढ़ावनिहारी।।
English explanation
A pleasant breeze—cool, gentle, and fragrant—blew, fanning the fire of desire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चली | बहने लगी | began to blow |
| सुहावनि | सुहावनी | pleasant |
| त्रिबिध | तीन गुणों वाली | having three qualities |
| बयारी | हवा | breeze |
| काम | कामना की | of desire |
| कृसानु | आग | fire |
| बढ़ावनिहारी | बढ़ाने वाली | intensifying |
2 रंभादिक सुरनारि नबीना । सकल असमसर कला प्रबीना।।
English explanation
There were youthful celestial women such as Rambha, all skilled in Kama’s arts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रंभादिक | रंभा आदि अप्सराएँ | Rambha and other celestial dancers |
| सुरनारि | देवलोक की स्त्रियाँ | celestial women |
| नबीना | तरुण | youthful |
| सकल | सभी | all |
| असमसर | कामदेव की | of Kama |
| कला | कलाओं में | in the arts |
| प्रबीना | निपुण | skilled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.126
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 137
- सहायक विषय
- अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 137, 138
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