बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेन्ह कर मरन एक बिधि होई। कहउँ बुझाइ सुनहु अब सोई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउनका मरण एक ही उपायसे हो सकता है, मैं समझाकर कहता हूँ। अब उसे सुनो। [उनके बलको बढ़ानेवाले] ब्राह्मणभोजन, यज्ञ, हवन और श्राद्ध—इन सबमें जाकर तुम बाधा डालो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 182 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तेन्ह कर मरन एक बिधि होई। कहउँ बुझाइ सुनहु अब सोई।।
द्विजभोजन मख होम सराधा।।सब कै जाइ करहु तुम्ह बाधा।।
स्रोत अभिलेख 1.181 · पुस्तक पृ. 181, 182
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तेन्ह कर मरन एक बिधि होई। कहउँ बुझाइ सुनहु अब सोई।।
English explanation
There is one way to bring about their death. I will explain it; listen now.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेन्ह | उन देवताओं | those gods |
| कर | का | of |
| मरन | मरण; मृत्यु | death |
| एक | एक | one |
| बिधि | विधि; उपाय से | by a method |
| होई | हो सकता है | can occur |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I tell; I will tell |
| बुझाइ | समझाकर | explaining |
| सुनहु | सुनो | listen |
| अब | अब | now |
| सोई | वही उपाय | that very method |
2 द्विजभोजन मख होम सराधा।।सब कै जाइ करहु तुम्ह बाधा।।
English explanation
Go and obstruct all these: feeding Brahmins, sacrifices, fire offerings, and ancestral rites.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| द्विजभोजन | ब्राह्मणों को भोजन कराना | feeding Brahmins |
| मख | यज्ञ | sacrificial rituals |
| होम | हवन; अग्नि में आहुति | offerings into the ritual fire |
| सराधा | श्राद्ध; पितरों के लिए कर्म | ancestral rites |
| सब | इन सभी | all these |
| कै | में; इनके संबंध में | in; concerning |
| जाइ | जाकर | having gone; go and |
| करहु | करो; डालो | make; cause |
| तुम्ह | तुम सब | you all |
| बाधा | रुकावट; विघ्न | obstruction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.181
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 182
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 181, 182
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।