बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्ह सुचि सुमति परम प्रिय मोरें। प्रीति प्रतीति मोहि पर तोरें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतुम पवित्र और सुन्दर बुद्धिवाले हो, इससे मुझे बहुत ही प्यारे हो और तुम्हारी भी मुझपर प्रीति और विश्वास है। हे तात! अब यदि मैं तुमसे कुछ छिपाता हूँ तो मुझे बहुत ही भयानक दोष लगेगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 166 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तुम्ह सुचि सुमति परम प्रिय मोरें। प्रीति प्रतीति मोहि पर तोरें।।
अब जौं तात दुरावउँ तोही। दारुन दोष घटइ अति मोही।।
स्रोत अभिलेख 1.162 · पुस्तक पृ. 166, 167
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तुम्ह सुचि सुमति परम प्रिय मोरें। प्रीति प्रतीति मोहि पर तोरें।।
English explanation
You are pure and wise, and exceedingly dear to me. You have love for me and trust in me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम | you |
| सुचि | पवित्र | pure |
| सुमति | अच्छी बुद्धि वाले | wise; of sound judgment |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| मोरें | मुझे; मेरे लिए | to me |
| प्रीति | प्रेम | love |
| प्रतीति | विश्वास | trust |
| मोहि | मुझ | me |
| पर | पर | in; toward |
| तोरें | तुम्हारा; तुम्हें है | yours; you have |
2 अब जौं तात दुरावउँ तोही। दारुन दोष घटइ अति मोही।।
English explanation
Now, dear one, if I conceal it from you, I will incur a very grave fault.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| जौं | यदि | if |
| तात | प्रिय; स्नेहपूर्ण संबोधन | dear one |
| दुरावउँ | मैं छिपाऊँ | I conceal |
| तोही | तुमसे | from you |
| दारुन | भीषण; गंभीर | grave; severe |
| दोष | दोष | fault; blame |
| घटइ | लगे; आ पड़े | befalls; is incurred |
| अति | अत्यंत | very; exceedingly |
| मोही | मुझे | by me; upon me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.162
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 166
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 166, 167
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।