बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तातें गुपुत रहउँ जग माहीं। हरि तजि किमपि प्रयोजन नाहीं।।
मूल पाठ
तातें गुपुत रहउँ जग माहीं। हरि तजि किमपि प्रयोजन नाहीं।।
प्रभु जानत सब बिनहिं जनाएँ। कहहु कवनि सिधि लोक रिझाएँ।।
स्रोत अभिलेख 1.162 · पुस्तक पृ. 166, 167
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[कपट-तपस्वीने कहा—] इसीसे मैं जगत्में छिपकर रहता हूँ। श्रीहरिको छोड़कर किसीसे कुछ भी प्रयोजन नहीं रखता। प्रभु तो बिना जनाये ही सब जानते हैं। फिर कहो संसारको रिझानेसे क्या सिद्धि मिलेगी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 166 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तातें गुपुत रहउँ जग माहीं। हरि तजि किमपि प्रयोजन नाहीं।।
English explanation
Therefore I remain unknown in the world. I have no purpose whatsoever apart from the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तातें | इसलिए | therefore |
| गुपुत | गुप्त; अपनी पहचान छिपाकर | unknown; concealing my identity |
| रहउँ | मैं रहता हूँ | I remain |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| हरि | हरि; भगवान | the Lord |
| तजि | को छोड़कर; के सिवा | apart from; except for |
| किमपि | कुछ भी; कोई भी | any whatsoever |
| प्रयोजन | उद्देश्य; सरोकार | purpose; concern |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
2 प्रभु जानत सब बिनहिं जनाएँ। कहहु कवनि सिधि लोक रिझाएँ।।
English explanation
The Lord knows everything without being told. Tell me, what accomplishment comes from pleasing people?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | भगवान | the Lord |
| जानत | जानते हैं | knows |
| सब | सब कुछ | everything |
| बिनहिं | बिना ही | even without |
| जनाएँ | बताए; जानकारी दिए | being informed |
| कहहु | कहो; बताओ | tell me |
| कवनि | कौन-सी | what; which |
| सिधि | सिद्धि; उपलब्धि | accomplishment; attainment |
| लोक | लोगों को | people |
| रिझाएँ | प्रसन्न करने से | by pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.162
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 166
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 166, 167
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।