बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा।।
मूल पाठ
तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा।।
सुनत लखन के बचन कठोरा। परसु सुधारि धरेउ कर घोरा।।
स्रोत अभिलेख 1.275 · पुस्तक पृ. 263, 264
भावार्थ
मूल पाठ के बादआप तो मानो कालको हाँक लगाकर बार-बार उसे मेरे लिये बुलाते हैं। लक्ष्मणजीके कठोर वचन सुनते ही परशुरामजीने अपने भयानक फरसेको सुधारकर हाथमें ले लिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 263 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा।।
English explanation
You seem to have summoned death with a shout; you keep calling out to me again and again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुमने | you |
| तौ | तो | indeed |
| कालु | मृत्यु को | death |
| हाँक | हाँक लगाकर | with a shout |
| जनु | मानो | as though |
| लावा | बुला लिया | have summoned |
| बार | बार | time |
| बार | बार | after time |
| मोहि | मुझे | me |
| लागि | ही लक्ष्य करके | specifically addressing |
| बोलावा | पुकारते हो | you call out |
2 सुनत लखन के बचन कठोरा। परसु सुधारि धरेउ कर घोरा।।
English explanation
Hearing Lakshmana’s harsh words, Parashurama readied his fearsome axe and took it in his hand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| के | के | of |
| बचन | वचन | words |
| कठोरा | कठोर | harsh |
| परसु | फरसा | battle-axe |
| सुधारि | सँभालकर | having readied |
| धरेउ | धारण किया | took up |
| कर | हाथ में | in his hand |
| घोरा | भयंकर | fearsome |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.275
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 263
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 263, 264
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।