बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तासु वचन अति सियहि सुहाने। दरस लागि लोचन अकुलाने।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउसके वचन सीताजीको अत्यन्त ही प्रिय लगे और दर्शनके लिये उनके नेत्र अकुला उठे। उसी प्यारी सखीको आगे करके सीताजी चलीं। पुरानी प्रीतिको कोई लख नहीं पाता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 225 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तासु वचन अति सियहि सुहाने। दरस लागि लोचन अकुलाने।।
चली अग्र करि प्रिय सखि सोई। प्रीति पुरातन लखइ न कोई।।
स्रोत अभिलेख 1.229 · पुस्तक पृ. 224, 225
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तासु वचन अति सियहि सुहाने। दरस लागि लोचन अकुलाने।।
English explanation
That companion’s words greatly pleased Sita. Her eyes grew restless with longing to see them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उस सखी के | that companion’s |
| वचन | वचन | words |
| अति | बहुत | greatly |
| सियहि | सीता को | to Sita |
| सुहाने | प्रिय लगे | were pleasing |
| दरस | दर्शन के | the sight of them |
| लागि | लिए | for |
| लोचन | नेत्र | her eyes |
| अकुलाने | व्याकुल हो उठे | grew restless |
2 चली अग्र करि प्रिय सखि सोई। प्रीति पुरातन लखइ न कोई।।
English explanation
Sita set out with that dear companion leading the way. No one perceives her age-old love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चली | सीता चलीं | Sita set out |
| अग्र | आगे | in front |
| करि | करके | placing |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| सखि | सखी को | the companion |
| सोई | उसी | that very |
| प्रीति | प्रेम | love |
| पुरातन | पुरातन | age-old |
| लखइ | पहचानता है | perceives |
| न | नहीं | not |
| कोई | कोई | anyone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.229
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 225
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 224, 225
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।