बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तापस नृप निज सखहि निहारी। हरषि मिलेउ उठि भयउ सुखारी।।
मूल पाठ
तापस नृप निज सखहि निहारी। हरषि मिलेउ उठि भयउ सुखारी।।
मित्रहि कहि सब कथा सुनाई। जातुधान बोला सुख पाई।।
स्रोत अभिलेख 1.171 · पुस्तक पृ. 173, 174
भावार्थ
मूल पाठ के बादतपस्वी राजा अपने मित्रको देख प्रसन्न हो उठकर मिला और सुखी हुआ। उसने मित्रको सब कथा कह सुनायी, तब राक्षस आनन्दित होकर बोला॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 173 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तापस नृप निज सखहि निहारी। हरषि मिलेउ उठि भयउ सुखारी।।
English explanation
Seeing his friend, the king disguised as an ascetic rejoiced, rose to meet him, and felt happy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तापस | तपस्वी-वेशधारी | disguised as an ascetic |
| नृप | राजा | king |
| निज | अपने | his own |
| सखहि | मित्र को | his friend |
| निहारी | देखकर | having seen |
| हरषि | हर्षित होकर | rejoicing |
| मिलेउ | मिला | met |
| उठि | उठकर | having risen |
| भयउ | हुआ | became |
| सुखारी | सुखी | happy |
2 मित्रहि कहि सब कथा सुनाई। जातुधान बोला सुख पाई।।
English explanation
He told his friend the entire story. The demon, pleased, spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मित्रहि | मित्र को | to his friend |
| कहि | कहकर | telling |
| सब | सारी | all |
| कथा | कथा | the story |
| सुनाई | सुनाई | related |
| जातुधान | राक्षस | the demon |
| बोला | बोला | said |
| सुख | प्रसन्नता | pleasure |
| पाई | पाकर | having gained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.171
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 173
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 173, 174
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।