बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात जनकतनया यह सोई। धनुषजग्य जेहि कारन होई।।
मूल पाठ
तात जनकतनया यह सोई। धनुषजग्य जेहि कारन होई।।
पूजन गौरि सखीं लै आई। करत प्रकासु फिरइ फुलवाई।।
स्रोत अभिलेख 1.231 · पुस्तक पृ. 226, 227
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! यह वही जनकजीकी कन्या है जिसके लिये धनुषयज्ञ हो रहा है। सखियाँ इसे गौरीपूजनके लिये ले आयी हैं। यह फुलवाड़ीमें प्रकाश करती हुई फिर रही है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 226 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तात जनकतनया यह सोई। धनुषजग्य जेहि कारन होई।।
English explanation
AI draft: Dear brother, this is that very daughter of Janaka, Sita, for whose sake the bow ceremony is being held.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे प्रिय भाई | dear brother |
| जनकतनया | जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
| यह | यह | this |
| सोई | वही | that very one |
| धनुषजग्य | धनुषयज्ञ | bow ceremony |
| जेहि | जिनके | whose |
| कारन | लिए | for the sake of |
| होई | हो रहा है | is taking place |
2 पूजन गौरि सखीं लै आई। करत प्रकासु फिरइ फुलवाई।।
English explanation
She has come with her companions to worship Gauri and walks through the flower garden, radiating her beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूजन | पूजा करने | to worship |
| गौरि | गौरी देवी की | Gauri, the goddess Parvati |
| सखीं | सखियों को | her companions |
| लै | साथ लेकर | bringing along |
| आई | आई हैं | has come |
| करत | करती हुई | making |
| प्रकासु | अपनी शोभा का प्रकाश | her beauty radiant |
| फिरइ | घूम रही हैं | walks about |
| फुलवाई | फुलवारी में | in the flower garden |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.231
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 226
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 226, 227
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।