बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात अनल कर सहज सुभाऊ। हिम तेहि निकट जाइ नहिं काऊ।।
मूल पाठ
तात अनल कर सहज सुभाऊ। हिम तेहि निकट जाइ नहिं काऊ।।
गएँ समीप सो अवसि नसाई। असि मन्मथ महेस की नाई।।
स्रोत अभिलेख 1.9 · पुस्तक पृ. 104, 105
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! अग्रिका तो यह सहज स्वभाव ही है कि पाला उसके समीप कभी जा ही नहीं सकता और जानेपर वह अवश्य नष्ट हो जायगा। महादेवजी और कामदेवके सम्बन्धमें भी यही न्याय (बात) समझना चाहिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 105 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तात अनल कर सहज सुभाऊ। हिम तेहि निकट जाइ नहिं काऊ।।
English explanation
Dear sirs, such is fire’s inherent nature that snow can never approach it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे तात; आदरणीय जन | dear sirs |
| अनल | अग्नि | fire |
| कर | का | of |
| सहज | स्वाभाविक | inherent |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
| हिम | बर्फ | snow |
| तेहि | उसके | it; that fire |
| निकट | पास | near |
| जाइ | जाती है | goes |
| नहिं | नहीं | not |
| काऊ | कभी | ever |
2 गएँ समीप सो अवसि नसाई। असि मन्मथ महेस की नाई।।
English explanation
If snow comes near, it inevitably perishes; the same analogy applies to the god of desire and Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गएँ | जाने पर | upon going |
| समीप | पास | near |
| सो | वह बर्फ | that snow |
| अवसि | अवश्य | certainly |
| नसाई | नष्ट हो जाती है | perishes |
| असि | ऐसी | such |
| मन्मथ | कामदेव | the god of desire |
| महेस | शिव | Shiva |
| की | की | of |
| नाई | उपमा; तुलना | analogy; comparison |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 105
- सहायक विषय
- देवताओंका शिवजीसे ब्याहके लिये प्रार्थना करना, सप्तर्षियोंका पार्वतीके पास जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 104, 105
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।