बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब बिदेह बोले कर जोरी। बचन सनेह सुधाँ जनु बोरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब जनकजी हाथ जोड़कर मानो स्नेहरूपी अमृतमें डुबोकर वचन बोले—मैं किस तरह बनाकर (किन शब्दोंमें) विनती करूँ। हे महाराज! आपने मुझे बड़ी बड़ाई दी है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 324 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तब बिदेह बोले कर जोरी। बचन सनेह सुधाँ जनु बोरी।।
करौ कवन बिधि बिनय बनाई। महाराज मोहि दीन्हि बड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 1.34 · पुस्तक पृ. 323, 324
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब बिदेह बोले कर जोरी। बचन सनेह सुधाँ जनु बोरी।।
English explanation
Then Janaka, king of Videha, spoke with folded hands; his words seemed steeped in the nectar of affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| बिदेह | विदेह राजा जनक | Janaka, king of Videha |
| बोले | बोले | spoke |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
| बचन | वचन | words |
| सनेह | स्नेह का | of affection |
| सुधाँ | अमृत में | in nectar |
| जनु | मानो | as though |
| बोरी | डुबोकर | having steeped |
2 करौ कवन बिधि बिनय बनाई। महाराज मोहि दीन्हि बड़ाई।।
English explanation
“How can I frame a fitting humble address? Your Majesty, you have bestowed great honor upon me.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करौ | मैं करूँ | may I make |
| कवन | किस | what |
| बिधि | प्रकार से | in what manner |
| बिनय | विनम्र निवेदन | humble address |
| बनाई | उचित रूप से रचकर | having suitably framed |
| महाराज | हे महाराज | Your Majesty |
| मोहि | मुझे | to me |
| दीन्हि | दी | bestowed |
| बड़ाई | प्रतिष्ठा और सम्मान | distinction and honor |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 324
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 323, 324
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।