बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब तब कथा मुनीसन्ह गाई। परम पुनीत प्रबंध बनाई।।
मूल पाठ
तब तब कथा मुनीसन्ह गाई। परम पुनीत प्रबंध बनाई।।
बिबिध प्रसंग अनूप बखाने। करहिं न सुनि आचरजु सयाने।।
स्रोत अभिलेख 1.14 · पुस्तक पृ. 148, 149
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब-तब मुनीश्वरोंने परम पवित्र काव्यरचना करके उनकी कथाओंका गान किया है और भाँति- भाँतिके अनुपम प्रसंगोंका वर्णन किया है, जिनको सुनकर समझदार (विवेकी) लोग आश्चर्य नहीं करते॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 148 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब तब कथा मुनीसन्ह गाई। परम पुनीत प्रबंध बनाई।।
English explanation
On each such occasion, great sages sang the story, composing supremely sacred narratives.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| तब | तब; हर उस अवसर पर | then; on each such occasion |
| कथा | कथा | the story |
| मुनीसन्ह | श्रेष्ठ मुनियों ने | the great sages |
| गाई | गाई; सुनाई | sang; recounted |
| परम | अत्यंत | supremely |
| पुनीत | पवित्र | sacred |
| प्रबंध | सुसंगठित काव्य-कथा | a structured poetic narrative |
| बनाई | बनाकर; रचकर | having composed |
2 बिबिध प्रसंग अनूप बखाने। करहिं न सुनि आचरजु सयाने।।
English explanation
They described various incomparable episodes; the wise are not astonished on hearing them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिबिध | विविध | various |
| प्रसंग | प्रसंग; घटनाएँ | episodes |
| अनूप | अनुपम | incomparable |
| बखाने | वर्णन किए | described |
| करहिं | करते हैं | feel; do |
| न | नहीं | not |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| आचरजु | आश्चर्य | astonishment |
| सयाने | समझदार लोग | the wise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 148
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 148, 149
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।