बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तन सकोचु मन परम उछाहू। गूढ़ प्रेमु लखि परइ न काहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसीताजीके शरीरमें संकोच है, पर मनमें परम उत्साह है। उनका यह गुप्त प्रेम किसीको जान नहीं पड़ रहा है। समीप जाकर, श्रीरामजीकी शोभा देखकर राजकुमारी सीताजी चित्रमें लिखी- सी रह गयीं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 255 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तन सकोचु मन परम उछाहू। गूढ़ प्रेमु लखि परइ न काहू।।
जाइ समीप राम छबि देखी। रहि जनु कुँअरि चित्र अवरेखी।।
स्रोत अभिलेख 1.264 · पुस्तक पृ. 255, 255
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तन सकोचु मन परम उछाहू। गूढ़ प्रेमु लखि परइ न काहू।।
English explanation
Her body shows shyness, while her mind is full of eagerness; no one can discern her deep, hidden love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तन | शरीर में | in the body |
| सकोचु | संकोच | shyness |
| मन | मन में | in the mind |
| परम | अत्यंत | supreme |
| उछाहू | उत्साह | eagerness |
| गूढ़ | गहरा और छिपा हुआ | deep and concealed |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| लखि | दिखाई | discerned |
| परइ | पड़ता है | becomes |
| न | नहीं | not |
| काहू | किसी को | to anyone |
2 जाइ समीप राम छबि देखी। रहि जनु कुँअरि चित्र अवरेखी।।
English explanation
Going near, she beheld Rama’s beauty and stood still, as though the princess were drawn in a painting.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाइ | जाकर | having gone |
| समीप | पास | near |
| राम | राम की | of Rama |
| छबि | सुंदरता | beauty |
| देखी | देखी | beheld |
| रहि | स्थिर रह गईं | remained motionless |
| जनु | मानो | as though |
| कुँअरि | राजकुमारी सीता | Princess Sita |
| चित्र | चित्र में | in a painting |
| अवरेखी | अंकित | drawn |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.264
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 255
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 255, 255
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।