बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चतुर सखीं लखि कहा बुझाई। पहिरावहु जयमाल सुहाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दचतुर सखीने यह दशा देखकर समझाकर कहा—सुहावनी जयमाला पहनाओ। यह सुनकर सीताजीने दोनों हाथोंसे माला उठायी, पर प्रेमके विवश होनेसे पहनायी नहीं जाती॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 255 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चतुर सखीं लखि कहा बुझाई। पहिरावहु जयमाल सुहाई।।
सुनत जुगल कर माल उठाई। प्रेम बिबस पहिराइ न जाई।।
स्रोत अभिलेख 1.264 · पुस्तक पृ. 255, 255
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 चतुर सखीं लखि कहा बुझाई। पहिरावहु जयमाल सुहाई।।
English explanation
Seeing this, her perceptive companions gently urged her, ‘Put the lovely victory garland on him.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चतुर | समझदार | perceptive |
| सखीं | सखियों ने | her female companions |
| लखि | देखकर | having noticed |
| कहा | कहा | said |
| बुझाई | समझाकर | by gently explaining |
| पहिरावहु | पहना दो | put it on him |
| जयमाल | विजय की वरण-माला | victory garland for choosing a bridegroom |
| सुहाई | सुंदर | lovely |
2 सुनत जुगल कर माल उठाई। प्रेम बिबस पहिराइ न जाई।।
English explanation
On hearing this, she raised the garland with both hands, but, overwhelmed by love, could not place it on him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| जुगल | दोनों | both |
| कर | हाथों से | with her hands |
| माल | माला | the garland |
| उठाई | उठाई | raised |
| प्रेम | प्रेम से | by love |
| बिबस | विवश | overwhelmed |
| पहिराइ | पहनाना | putting it on him |
| न | नहीं | not |
| जाई | हो पाता | is possible |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.264
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 255
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 255, 255
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।