बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तदपि जथा श्रुत जसि मति मोरी। कहिहउँ देखि प्रीति अति तोरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतो भी तुम्हारी अत्यन्त प्रीति देखकर, जैसा कुछ मैंने सुना है और जैसी मेरी बुद्धि है, उसीके अनुसार मैं कहूँगा। हे पार्वती! तुम्हारा प्रश्न स्वाभाविक ही सुन्दर, सुखदायक और संतसम्मत है और मुझे तो बहुत ही अच्छा लगा है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 127 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तदपि जथा श्रुत जसि मति मोरी। कहिहउँ देखि प्रीति अति तोरी।।
उमा प्रस्न तव सहज सुहाई। सुखद संतसंमत मोहि भाई।।
स्रोत अभिलेख 1.114 · पुस्तक पृ. 126, 127
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तदपि जथा श्रुत जसि मति मोरी। कहिहउँ देखि प्रीति अति तोरी।।
English explanation
Nevertheless, seeing your great love, I shall tell it according to what I have heard and the measure of my understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| जथा | जैसा, के अनुसार | according to what |
| श्रुत | सुना है | has been heard |
| जसि | जैसी | such as |
| मति | बुद्धि, समझ | understanding |
| मोरी | मेरी | my |
| कहिहउँ | मैं कहूँगा | I shall tell |
| देखि | देखकर | seeing |
| प्रीति | प्रेम | love |
| अति | अत्यधिक | great |
| तोरी | तुम्हारा | your |
2 उमा प्रस्न तव सहज सुहाई। सुखद संतसंमत मोहि भाई।।
English explanation
O Uma, your question is naturally lovely, brings joy, and is approved by saints; it has pleased me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| प्रस्न | प्रश्न, पूछी हुई बात | question |
| तव | तुम्हारा | your |
| सहज | स्वभावतः | naturally |
| सुहाई | सुंदर, मनोहर | lovely |
| सुखद | सुख देने वाला | joy-giving |
| संतसंमत | संतों द्वारा अनुमोदित | approved by saints |
| मोहि | मुझे | to me |
| भाई | अच्छा लगा | was pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.114
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 127
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 126, 127
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।