बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तदपि कही गुर बारहिं बारा। समुझि परी कछु मति अनुसारा।।
मूल पाठ
तदपि कही गुर बारहिं बारा। समुझि परी कछु मति अनुसारा।।
भाषाबद्ध करबि मैं सोई। मोरें मन प्रबोध जेहिं होई।।
स्रोत अभिलेख 1.31 · पुस्तक पृ. 53, 54
भावार्थ
मूल पाठ के बादतो भी गुरुजीने जब बार-बार कथा कही, तब बुद्धिके अनुसार कुछ समझमें आयी। वही अब मेरे द्वारा भाषामें रची जायगी, जिससे मेरे मनको सन्तोष हो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 53 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तदपि कही गुर बारहिं बारा। समुझि परी कछु मति अनुसारा।।
English explanation
AI draft: Even so, the teacher recounted the story repeatedly, and I understood something of it according to my capacity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तदपि | फिर भी | even so |
| कही | कथा कही | recounted the story |
| गुर | गुरु ने | the teacher |
| बारहिं | बार-बार | repeatedly |
| बारा | बार | times |
| समुझि | समझ में | into understanding |
| परी | आई | came |
| कछु | कुछ | something |
| मति | बुद्धि | intellectual capacity |
| अनुसारा | के अनुसार | according to |
2भाषाबद्ध करबि मैं सोई। मोरें मन प्रबोध जेहिं होई।।
English explanation
I shall compose that same story in the vernacular, so that my mind may gain understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाषाबद्ध | लोकभाषा में निबद्ध | composed in the vernacular |
| करबि | करूँगा | I shall make |
| मैं | मैं | I |
| सोई | वही कथा | that same story |
| मोरें | मेरे | my |
| मन | मन को | mind |
| प्रबोध | बोध | understanding |
| जेहिं | जिससे | through which |
| होई | हो | may arise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 53
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 53, 54
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।