बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तदपि करब मैं काजु तुम्हारा। श्रुति कह परम धरम उपकारा।।
मूल पाठ
तदपि करब मैं काजु तुम्हारा। श्रुति कह परम धरम उपकारा।।
पर हित लागि तजइ जो देही। संतत संत प्रसंसहिं तेही।।
स्रोत अभिलेख 1.84 · पुस्तक पृ. 98, 99
भावार्थ
मूल पाठ के बादतथापि मैं तुम्हारा काम तो करूँगा, क्योंकि वेद दूसरेके उपकारको परम धर्म कहते हैं। जो दूसरेके हितके लिये अपना शरीर त्याग देता है, संत सदा उसकी बड़ाई करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 98 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तदपि करब मैं काजु तुम्हारा। श्रुति कह परम धरम उपकारा।।
English explanation
Nevertheless, I will carry out your task. The Vedas declare helping others to be the highest duty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| करब | करूँगा | will do |
| मैं | मैं | I |
| काजु | काम | task |
| तुम्हारा | तुम्हारा | your |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| कह | कहते हैं | declare |
| परम | सर्वोच्च | highest |
| धरम | धर्म | duty |
| उपकारा | परोपकार | helping others |
2 पर हित लागि तजइ जो देही। संतत संत प्रसंसहिं तेही।।
English explanation
The saints always praise one who gives up their body for the welfare of others.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पर | दूसरों का | of others |
| हित | कल्याण | welfare |
| लागि | के लिए | for the sake of |
| तजइ | त्याग देता है | gives up |
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| देही | शरीर | the body |
| संतत | सदा | always |
| संत | संतजन | saints |
| प्रसंसहिं | प्रशंसा करते हैं | praise |
| तेही | उसी की | that person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.84
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 98
- सहायक विषय
- कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना
- मुद्रित पृष्ठ
- 98, 99
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।