बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तकि तकि तीर महीस चलावा। करि छल सुअर सरीर बचावा।।
मूल पाठ
तकि तकि तीर महीस चलावा। करि छल सुअर सरीर बचावा।।
प्रगटत दुरत जाइ मृग भागा। रिस बस भूप चलेउ संग लागा।।
स्रोत अभिलेख 1.157 · पुस्तक पृ. 162, 163
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा तक-तककर तीर चलाता है, परन्तु सूअर छल करके शरीरको बचाता जाता है। वह पशु कभी प्रकट होता और कभी छिपता हुआ भागा जाता था; और राजा भी क्रोधके वश उसके साथ (पीछे) लगा चला जाता था॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 162 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तकि तकि तीर महीस चलावा। करि छल सुअर सरीर बचावा।।
English explanation
The king repeatedly aimed and shot arrows, while the boar used evasive tricks to protect its body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तकि | निशाना साधकर | taking aim |
| तकि | फिर निशाना साधकर | taking aim again |
| तीर | बाण | arrows |
| महीस | राजा | the king |
| चलावा | चलाता था | kept shooting |
| करि | करके | using |
| छल | छल या चकमा | evasive tricks |
| सुअर | जंगली सूअर | the boar |
| सरीर | अपना शरीर | its body |
| बचावा | बचाता था | kept protecting |
2 प्रगटत दुरत जाइ मृग भागा। रिस बस भूप चलेउ संग लागा।।
English explanation
The animal fled, now appearing and now hiding; driven by anger, the king kept pursuing it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रगटत | दिखाई देता हुआ | appearing |
| दुरत | छिपता हुआ | hiding |
| जाइ | जाता हुआ | going onward |
| मृग | वह वन्य पशु, वराह | the wild animal, the boar |
| भागा | भागा | fled |
| रिस | क्रोध के | of anger |
| बस | वश में | under the sway |
| भूप | राजा | the king |
| चलेउ | चल पड़ा | went onward |
| संग | उसके पीछे | after it |
| लागा | लगा हुआ | in pursuit |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.157
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 162
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 162, 163
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।