बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गयउ दूरि घन गहन बराहू। जहँ नाहिन गज बाजि निबाहू।।
मूल पाठ
गयउ दूरि घन गहन बराहू। जहँ नाहिन गज बाजि निबाहू।।
अति अकेल बन बिपुल कलेसू। तदपि न मृग मग तजइ नरेसू।।
स्रोत अभिलेख 1.157 · पुस्तक पृ. 162, 163
भावार्थ
मूल पाठ के बादसूअर बहुत दूर ऐसे घने जंगलमें चला गया, जहाँ हाथी-घोड़ेका निबाह (गम) नहीं था। राजा बिलकुल अकेला था और वनमें क्लेश भी बहुत था, फिर भी राजाने उस पशुका पीछा नहीं छोड़ा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 162 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गयउ दूरि घन गहन बराहू। जहँ नाहिन गज बाजि निबाहू।।
English explanation
The boar went far into a dense, difficult forest where elephants and horses could not make their way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गयउ | चला गया | went |
| दूरि | दूर | far away |
| घन | घने | dense |
| गहन | दुर्गम वन में | into the difficult forest |
| बराहू | वराह | the boar |
| जहँ | जहाँ | where |
| नाहिन | नहीं था | there was no |
| गज | हाथियों का | for elephants |
| बाजि | घोड़ों का | for horses |
| निबाहू | चलने या टिकने की गुंजाइश | possibility of proceeding or remaining |
2 अति अकेल बन बिपुल कलेसू। तदपि न मृग मग तजइ नरेसू।।
English explanation
The king was utterly alone in the forest and faced great hardship; nevertheless, he would not abandon the animal’s trail.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | utterly |
| अकेल | अकेला | alone |
| बन | वन में | in the forest |
| बिपुल | बहुत अधिक | great |
| कलेसू | कष्ट | hardship |
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| न | नहीं | not |
| मृग | उस पशु का | the animal’s |
| मग | मार्ग या पदचिह्नों की राह | path or trail |
| तजइ | छोड़ता है | abandons |
| नरेसू | राजा | the king |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.157
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 162
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 162, 163
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।