बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं मो पर प्रसन्न सुखरासी। जानिअ सत्य मोहि निज दासी।।
मूल पाठ
जौं मो पर प्रसन्न सुखरासी। जानिअ सत्य मोहि निज दासी।।
तौं प्रभु हरहु मोर अग्याना। कहि रघुनाथ कथा बिधि नाना।।
स्रोत अभिलेख 1.108 · पुस्तक पृ. 121, 122
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे सुखकी राशि! यदि आप मुझपर प्रसन्न हैं और सचमुच मुझे अपनी दासी [या अपनी सच्ची दासी] जानते हैं, तो हे प्रभो! आप श्रीरघुनाथजीकी नाना प्रकारकी कथा कहकर मेरा अज्ञान दूर कीजिये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 121 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौं मो पर प्रसन्न सुखरासी। जानिअ सत्य मोहि निज दासी।।
English explanation
AI-generated meaning draft: O source of bliss, if you are pleased with me and truly regard me as your servant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| मो | मुझ | me |
| पर | पर | with; toward |
| प्रसन्न | प्रसन्न हैं | are pleased |
| सुखरासी | हे सुख के भंडार | O source of bliss |
| जानिअ | मानते हैं | regard |
| सत्य | सचमुच | truly |
| मोहि | मुझे | me |
| निज | अपनी | your own |
| दासी | सेविका | female servant |
2 तौं प्रभु हरहु मोर अग्याना। कहि रघुनाथ कथा बिधि नाना।।
English explanation
Then, Lord, remove my ignorance by recounting Rama’s story in various ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तौं | तो | then |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| हरहु | दूर कीजिए | remove |
| मोर | मेरा | my |
| अग्याना | अज्ञान | ignorance |
| कहि | कहकर | by recounting |
| रघुनाथ | श्रीराम की | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| कथा | कथा | story |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| नाना | विविध | various |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.108
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 121
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 121, 122
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।