बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं न चलब हम कहे तुम्हारें। होउ नास नहिं सोच हमारें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयदि मैं आपके कथनके अनुसार नहीं चलूँगा, तो [भले ही] मेरा नाश हो जाय। मुझे इसकी चिन्ता नहीं है। मेरा मन तो हे प्रभो! [केवल] एक ही डरसे डर रहा है कि ब्राह्मणोंका शाप बड़ा भयानक होता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 170 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जौं न चलब हम कहे तुम्हारें। होउ नास नहिं सोच हमारें।।
एकहिं डर डरपत मन मोरा। प्रभु महिदेव श्राप अति घोरा।।
स्रोत अभिलेख 1.166 · पुस्तक पृ. 169, 170
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौं न चलब हम कहे तुम्हारें। होउ नास नहिं सोच हमारें।।
English explanation
If I do not follow your instructions, let me be destroyed; I have no anxiety about that.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| न | नहीं | not |
| चलब | चलूँगा; आचरण करूँगा | shall act |
| हम | मैं | I |
| कहे | कहे अनुसार | according to the instructions |
| तुम्हारें | तुम्हारे | your |
| होउ | हो जाए | let there be |
| नास | नाश | destruction |
| नहिं | नहीं है | there is no |
| सोच | चिंता | anxiety |
| हमारें | मुझे | for me |
2 एकहिं डर डरपत मन मोरा। प्रभु महिदेव श्राप अति घोरा।।
English explanation
Master, my heart fears only one thing: a Brahmin’s curse is exceedingly terrible.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एकहिं | एक ही | only one |
| डर | भय से | fear |
| डरपत | डरता है | is afraid |
| मन | मन | heart |
| मोरा | मेरा | my |
| प्रभु | हे स्वामी | O master |
| महिदेव | ब्राह्मण का | a Brahmin’s |
| श्राप | शाप | curse |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| घोरा | भयंकर | terrible |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.166
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 170
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 169, 170
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।