बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं तुम्ह मिलतेहु प्रथम मुनीसा। सुनतिउँ सिख तुम्हारि धरि सीसा।।
मूल पाठ
जौं तुम्ह मिलतेहु प्रथम मुनीसा। सुनतिउँ सिख तुम्हारि धरि सीसा।।
अब मैं जन्मु संभु हित हारा। को गुन दूषन करै बिचारा।।
स्रोत अभिलेख 1.81 · पुस्तक पृ. 96, 96
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे मुनीश्वरो! यदि आप पहले मिलते, तो मैं आपका उपदेश सिर-माथे रखकर सुनती। परंतु अब तो मैं अपना जन्म शिवजीके लिये हार चुकी। फिर गुण-दोषोंका विचार कौन करे?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 96 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौं तुम्ह मिलतेहु प्रथम मुनीसा। सुनतिउँ सिख तुम्हारि धरि सीसा।।
English explanation
AI draft: O foremost sages, had you met me earlier, I would have listened to your counsel with reverence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| तुम्ह | आप | you |
| मिलतेहु | मिले होते | had met me |
| प्रथम | पहले | earlier |
| मुनीसा | हे मुनिश्रेष्ठों | O foremost sages |
| सुनतिउँ | मैं सुनती | I would have listened |
| सिख | सीख; उपदेश | counsel |
| तुम्हारि | आपकी | your |
| धरि | रखकर | placing |
| सीसा | सिर पर | upon my head |
2 अब मैं जन्मु संभु हित हारा। को गुन दूषन करै बिचारा।।
English explanation
Now I have surrendered my life in love for Shiva; who would weigh merits and faults?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| मैं | मैंने | I |
| जन्मु | जीवन | my life |
| संभु | शिव | Shiva |
| हित | प्रेम में; हेतु | in love for |
| हारा | समर्पित कर दिया | have surrendered |
| को | कौन | who |
| गुन | गुण | merits |
| दूषन | दोष | faults |
| करै | करे | would make |
| बिचारा | विचार | an assessment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.81
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 96
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 96, 96
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