बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं तुम्ह औतेहु मुनि की नाईं। पद रज सिर सिसु धरत गोसाईं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयदि आप मुनिकी तरह आते, तो हे स्वामी! बालक आपके चरणोंकी धूलि सिरपर रखता। अनजानेकी भूलको क्षमा कर दीजिये। ब्राह्मणोंके हृदयमें बहुत अधिक दया होनी चाहिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 269 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जौं तुम्ह औतेहु मुनि की नाईं। पद रज सिर सिसु धरत गोसाईं।।
छमहु चूक अनजानत केरी। चहिअ बिप्र उर कृपा घनेरी।।
स्रोत अभिलेख 1.282 · पुस्तक पृ. 269, 270
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जौं तुम्ह औतेहु मुनि की नाईं। पद रज सिर सिसु धरत गोसाईं।।
English explanation
My lord, had you come as a sage, the boy would have placed the dust of your feet upon his head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| तुम्ह | आप | you |
| औतेहु | आए होते | had come |
| मुनि | मुनि; तपस्वी | a sage |
| की | की | of |
| नाईं | तरह | in the manner |
| पद | चरणों की | of your feet |
| रज | धूल | dust |
| सिर | सिर पर | upon his head |
| सिसु | बालक; लक्ष्मण | the boy, Lakshmana |
| धरत | रखता | would have placed |
| गोसाईं | हे स्वामी | my lord |
2 छमहु चूक अनजानत केरी। चहिअ बिप्र उर कृपा घनेरी।।
English explanation
Forgive the mistake made unknowingly; a Brahmin’s heart should hold abundant compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छमहु | क्षमा कीजिए | please forgive |
| चूक | भूल | mistake |
| अनजानत | अनजाने में | unknowingly |
| केरी | की; उससे हुई | arising from |
| चहिअ | होनी चाहिए | there should be |
| बिप्र | ब्राह्मण के | a Brahmin’s |
| उर | हृदय में | in the heart |
| कृपा | दया | compassion |
| घनेरी | बहुत अधिक | abundant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.282
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 269
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 269, 270
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।