बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं तुम्हरें मन अति संदेहू। तौ किन जाइ परीछा लेहू।।
मूल पाठ
जौं तुम्हरें मन अति संदेहू। तौ किन जाइ परीछा लेहू।।
तब लगि बैठ अहउँ बटछाहिं। जब लगि तुम्ह ऐहहु मोहि पाही।।
स्रोत अभिलेख 1.52 · पुस्तक पृ. 73, 74
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो तुम्हारे मनमें बहुत सन्देह है तो तुम जाकर परीक्षा क्यों नहीं लेती? जबतक तुम मेरे पास लौट आओगी तबतक मैं इसी बड़की छाँहमें बैठा हूँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 73 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौं तुम्हरें मन अति संदेहू। तौ किन जाइ परीछा लेहू।।
English explanation
If you have deep doubt in your mind, why not go and put him to the test?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| तुम्हरें | तुम्हारे | your |
| मन | मन में | in the mind |
| अति | बहुत | great; intense |
| संदेहू | संदेह | doubt |
| तौ | तो | then |
| किन | क्यों नहीं | why not |
| जाइ | जाकर | having gone |
| परीछा | परीक्षा | a test |
| लेहू | ले लो | take; conduct |
2 तब लगि बैठ अहउँ बटछाहिं। जब लगि तुम्ह ऐहहु मोहि पाही।।
English explanation
I shall remain seated in the banyan's shade until you return to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब तक | until then |
| लगि | तक | until |
| बैठ | बैठा | seated |
| अहउँ | मैं हूँ; यहाँ रहूँगा | I am; here, I shall remain |
| बटछाहिं | बरगद की छाया में | in the banyan's shade |
| जब | जब | when |
| लगि | तक | until |
| तुम्ह | तुम | you, Sati |
| ऐहहु | आओगी | will come |
| मोहि | मेरे | me |
| पाही | पास | near; to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.52
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 73
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 73, 74
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।