बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जैसें जाइ मोह भ्रम भारी। करेहु सो जतनु बिबेक बिचारी।।
मूल पाठ
जैसें जाइ मोह भ्रम भारी। करेहु सो जतनु बिबेक बिचारी।।
चलीं सती सिव आयसु पाई। करहिं बिचारु करौं का भाई।।
स्रोत अभिलेख 1.52 · पुस्तक पृ. 73, 74
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिस प्रकार तुम्हारा यह अज्ञानजनित भारी भ्रम दूर हो, [भलीभाँति] विवेकके द्वारा सोच- समझकर तुम वही करना। शिवजीकी आज्ञा पाकर सती चलीं और मनमें सोचने लगीं कि भाई! क्या करूँ (कैसे परीक्षा लूँ)?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 73 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जैसें जाइ मोह भ्रम भारी। करेहु सो जतनु बिबेक बिचारी।।
English explanation
Reflect with discernment and use whatever means will dispel the deep delusion and confusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जैसें | जिस तरह | in whatever way |
| जाइ | दूर हो जाए | may pass away |
| मोह | मोह; वास्तविकता न समझ पाने का भाव | delusion |
| भ्रम | भ्रम; गलत धारणा | confusion; mistaken belief |
| भारी | गहरा; प्रबल | deep; strong |
| करेहु | करना | do; undertake |
| सो | वही | that very |
| जतनु | उपाय; प्रयास | means; effort |
| बिबेक | विवेक से | with discernment |
| बिचारी | विचार करके | having reflected |
2 चलीं सती सिव आयसु पाई। करहिं बिचारु करौं का भाई।।
English explanation
Having received Shiva's permission, Sati set out, pondering, 'What, then, should I do?'
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलीं | चल पड़ीं | set out |
| सती | सती, शिव की पत्नी | Sati, Shiva's wife |
| सिव | शिव का | Shiva's |
| आयसु | आज्ञा; अनुमति | command; permission |
| पाई | पाकर | having received |
| करहिं | करती हैं | she does |
| बिचारु | विचार | reflection |
| करौं | मैं करूँ | should I do |
| का | क्या | what |
| भाई | भला; अरे भाई | then; O brother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.52
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 73
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 73, 74
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