बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इहाँ संभु अस मन अनुमाना। दच्छसुता कहुँ नहिं कल्याना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइधर शिवजीने मनमें ऐसा अनुमान किया कि दक्षकन्या सतीका कल्याण नहीं है। जब मेरे समझानेसे भी सन्देह दूर नहीं होता तब [मालूम होता है] विधाता ही उलटे हैं, अब सतीका कुशल नहीं है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 73 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
इहाँ संभु अस मन अनुमाना। दच्छसुता कहुँ नहिं कल्याना।।
मोरेहु कहें न संसय जाहीं। बिधी बिपरीत भलाई नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.52 · पुस्तक पृ. 73, 74
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 इहाँ संभु अस मन अनुमाना। दच्छसुता कहुँ नहिं कल्याना।।
English explanation
Meanwhile, Shiva concluded in his mind that things would not turn out well for Sati, Daksha's daughter.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इहाँ | इधर; यहाँ | here; meanwhile |
| संभु | शंभु अर्थात शिव ने | Shiva |
| अस | ऐसा | thus; this |
| मन | मन में | in his mind |
| अनुमाना | अनुमान किया | concluded; inferred |
| दच्छसुता | दक्ष की पुत्री सती | Sati, Daksha's daughter |
| कहुँ | के लिए | for |
| नहिं | नहीं | not |
| कल्याना | कल्याण; कुशल परिणाम | well-being; a good outcome |
2 मोरेहु कहें न संसय जाहीं। बिधी बिपरीत भलाई नाहीं।।
English explanation
Even at my words, her doubts do not go away. When fate is adverse, things do not turn out well.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोरेहु | मेरे भी | even my |
| कहें | कहने पर | upon saying; at the words |
| न | नहीं | not |
| संसय | संदेह | doubts |
| जाहीं | दूर होते | go away |
| बिधी | विधि; भाग्य | fate; providence |
| बिपरीत | प्रतिकूल होने पर | when adverse |
| भलाई | भलाई; कुशल परिणाम | well-being; a good outcome |
| नाहीं | नहीं होती | does not occur |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.52
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 73
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 73, 74
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।