बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं करि कष्ट जाइ पुनि कोई। जातहिं नींद जुड़ाई होई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयदि कोई मनुष्य कष्ट उठाकर वहाँतक पहुँच भी जाय, तो वहाँ जाते ही उसे नींदरूपी जूड़ी आ जाती है। हृदयमें मूर्खतारूपी बड़ा कड़ा जाड़ा लगने लगता है, जिससे वहाँ जाकर भी वह अभागा स्नान नहीं कर पाता॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 61 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जौं करि कष्ट जाइ पुनि कोई। जातहिं नींद जुड़ाई होई।।
जड़ता जाड़ बिषम उर लागा। गएहुँ न मज्जन पाव अभागा।।
स्रोत अभिलेख 1.39 · पुस्तक पृ. 61, 63
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जौं करि कष्ट जाइ पुनि कोई। जातहिं नींद जुड़ाई होई।।
English explanation
Even if someone takes the trouble to go there, sleep and a numbing chill overcome them upon arrival.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| करि | करके | having undertaken |
| कष्ट | कष्ट; कठिन प्रयास | trouble; arduous effort |
| जाइ | जाए | goes |
| पुनि | फिर भी | even so |
| कोई | कोई व्यक्ति | someone |
| जातहिं | जाते ही; पहुँचते ही | upon arriving |
| नींद | नींद | sleep |
| जुड़ाई | ठंडक; जड़ करने वाली शीतलता | coldness; a numbing chill |
| होई | हो जाती है | arises |
2 जड़ता जाड़ बिषम उर लागा। गएहुँ न मज्जन पाव अभागा।।
English explanation
The fierce cold of dullness grips the heart; even after reaching there, the unfortunate person cannot bathe.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जड़ता | जड़ता; समझ की निष्क्रियता | dullness; mental inertia |
| जाड़ | ठंड | cold |
| बिषम | भीषण | severe |
| उर | हृदय में | in the heart |
| लागा | लग गई | took hold |
| गएहुँ | जाने पर भी | even after going |
| न | नहीं | not |
| मज्जन | स्नान | bathing |
| पाव | कर पाता | is able to perform |
| अभागा | अभागा व्यक्ति | the unfortunate person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 61
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 61, 63
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।