बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं एहिं खल नित करब अहारू। होइहि सब उजारि संसारू।।
मूल पाठ
जौं एहिं खल नित करब अहारू। होइहि सब उजारि संसारू।।
सारद प्रेरि तासु मति फेरी। मागेसि नीद मास षट केरी।।
स्रोत अभिलेख 1.177 · पुस्तक पृ. 178, 178
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो यह दुष्ट नित्य आहार करेगा, तो सारा संसार ही उजाड़ हो जायगा। [ऐसा विचारकर] ब्रह्माजीने सरस्वतीको प्रेरणा करके उसकी बुद्धि फेर दी। [जिससे] उसने छ: महीनेकी नींद माँगी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 178 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जौं एहिं खल नित करब अहारू। होइहि सब उजारि संसारू।।
English explanation
‘If this wicked fellow eats every day, the whole world will be laid waste.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| एहिं | यह | this one |
| खल | दुष्ट | wicked fellow |
| नित | प्रतिदिन | daily |
| करब | करेगा | will do |
| अहारू | भोजन | eating |
| होइहि | हो जाएगा | will become |
| सब | सारा | entire |
| उजारि | उजाड़ | desolate |
| संसारू | संसार | world |
2 सारद प्रेरि तासु मति फेरी। मागेसि नीद मास षट केरी।।
English explanation
Brahma prompted Saraswati to alter Kumbhakarna’s understanding. He asked for six months of sleep.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सारद | सरस्वती को | Saraswati, goddess of speech |
| प्रेरि | प्रेरित करके | having prompted |
| तासु | उसकी—कुंभकर्ण की | his—Kumbhakarna’s |
| मति | बुद्धि | understanding |
| फेरी | बदल दी | altered |
| मागेसि | उसने माँगी | he asked for |
| नीद | नींद | sleep |
| मास | महीने | months |
| षट | छह | six |
| केरी | की | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.177
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 178
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 178, 178
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।