बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एवमस्तु तुम्ह बड़ तप कीन्हा। मैं ब्रह्माँ मिलि तेहि बर दीन्हा।।
मूल पाठ
एवमस्तु तुम्ह बड़ तप कीन्हा। मैं ब्रह्माँ मिलि तेहि बर दीन्हा।।
पुनि प्रभु कुंभकरन पहिं गयऊ। तेहि बिलोकि मन बिसमय भयऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.177 · पुस्तक पृ. 178, 178
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[शिवजी कहते हैं कि—] मैंने और ब्रह्माने मिलकर उसे वर दिया कि ऐसा ही हो, तुमने बड़ा तप किया है। फिर ब्रह्माजी कुम्भकर्णके पास गये। उसे देखकर उनके मनमें बड़ा आश्चर्य हुआ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 178 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एवमस्तु तुम्ह बड़ तप कीन्हा। मैं ब्रह्माँ मिलि तेहि बर दीन्हा।।
English explanation
‘So be it; you have performed great austerities.’ Brahma and I together granted him that boon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एवमस्तु | ऐसा ही हो | so be it |
| तुम्ह | तुमने | you |
| बड़ | बड़ी | great |
| तप | तपस्या | austerities |
| कीन्हा | की है | have performed |
| मैं | मैंने—कथा कहते हुए शिव ने | I—Shiva, the narrator |
| ब्रह्माँ | ब्रह्मा ने | Brahma |
| मिलि | मिलकर | together |
| तेहि | उस रावण को | to him, Ravana |
| बर | वरदान | boon |
| दीन्हा | दिया | granted |
2 पुनि प्रभु कुंभकरन पहिं गयऊ। तेहि बिलोकि मन बिसमय भयऊ।।
English explanation
Then Lord Brahma went to Kumbhakarna. Seeing him, he felt astonishment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| प्रभु | प्रभु ब्रह्मा | Lord Brahma |
| कुंभकरन | रावण के भाई कुंभकर्ण | Kumbhakarna, Ravana’s brother |
| पहिं | के पास | to |
| गयऊ | गए | went |
| तेहि | उसे | him |
| बिलोकि | देखकर | on seeing |
| मन | मन में | in his mind |
| बिसमय | विस्मय | astonishment |
| भयऊ | हुआ | arose |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.177
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 178
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 178, 178
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।