बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं अनीह ब्यापक बिभु कोऊ। कबहु बुझाइ नाथ मोहि सोऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयदि इच्छारहित, व्यापक, समर्थ ब्रह्म कोई और है, तो हे नाथ! मुझे उसे समझाकर कहिये। मुझे नादान समझकर मनमें क्रोध न लाइये। जिस तरह मेरा मोह दूर हो, वही कीजिये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 122 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जौं अनीह ब्यापक बिभु कोऊ। कबहु बुझाइ नाथ मोहि सोऊ।।
अग्य जानि रिस उर जनि धरहू। जेहि बिधि मोह मिटै सोइ करहू।।
स्रोत अभिलेख 1.109 · पुस्तक पृ. 122, 123
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जौं अनीह ब्यापक बिभु कोऊ। कबहु बुझाइ नाथ मोहि सोऊ।।
English explanation
If there is a desireless, all-pervading, sovereign reality, then, my lord, please explain that to me as well.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| अनीह | इच्छारहित | without desire |
| ब्यापक | सबमें व्याप्त | all-pervading |
| बिभु | सर्वसमर्थ प्रभु | sovereign, all-powerful |
| कोऊ | कोई सत्ता | some reality or being |
| कबहु | कभी | at some time |
| बुझाइ | समझाइए | please explain |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| मोहि | मुझे | to me |
| सोऊ | उसे भी | that too |
2 अग्य जानि रिस उर जनि धरहू। जेहि बिधि मोह मिटै सोइ करहू।।
English explanation
Knowing me to be ignorant, do not harbor anger in your heart; do whatever will dispel my delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अग्य | अज्ञानी | ignorant |
| जानि | जानकर | knowing |
| रिस | क्रोध | anger |
| उर | हृदय में | in the heart |
| जनि | मत | do not |
| धरहू | रखिए | harbor |
| जेहि | जिस | by whichever |
| बिधि | उपाय से | means |
| मोह | मोह; भ्रम | delusion |
| मिटै | मिट जाए | may be dispelled |
| सोइ | वही | that very thing |
| करहू | कीजिए | please do |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 122
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 122, 123
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।