बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेहि तुरंग पर रामु बिराजे। गति बिलोकि खगनायकु लाजे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिस घोड़ेपर श्रीरामजी विराजमान हैं, उसकी [तेज] चाल देखकर गरुड़ भी लजा जाते हैं। उसका वर्णन नहीं हो सकता, वह सब प्रकारसे सुन्दर है। मानो कामदेवने ही घोड़ेका वेष धारण कर लिया हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 297 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जेहि तुरंग पर रामु बिराजे। गति बिलोकि खगनायकु लाजे।।
कहि न जाइ सब भाँति सुहावा। बाजि बेषु जनु काम बनावा।।
स्रोत अभिलेख 1.316 · पुस्तक पृ. 296, 297
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जेहि तुरंग पर रामु बिराजे। गति बिलोकि खगनायकु लाजे।।
English explanation
Seeing the speed of the horse on which Rama is seated, even Garuda, chief of birds, feels abashed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिस | which |
| तुरंग | घोड़े | horse |
| पर | पर | on |
| रामु | श्रीराम | Rama, the prince of Ayodhya |
| बिराजे | विराजमान हैं | is seated in splendor |
| गति | गति | speed |
| बिलोकि | देखकर | on seeing |
| खगनायकु | पक्षियों के नायक गरुड़ | Garuda, chief of birds |
| लाजे | लजा जाते हैं | feels abashed |
2 कहि न जाइ सब भाँति सुहावा। बाजि बेषु जनु काम बनावा।।
English explanation
The horse is indescribably lovely in every way, as though Kama, the god of love, had assumed a horse’s form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | वर्णन किया | described |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| सब | हर | every |
| भाँति | प्रकार से | way |
| सुहावा | सुंदर | lovely |
| बाजि | घोड़े का | a horse’s |
| बेषु | वेश | form or guise |
| जनु | मानो | as though |
| काम | कामदेव ने | Kama, the god of love |
| बनावा | धारण कर लिया हो | had assumed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.316
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 297
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 296, 297
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।